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Archive for सितम्बर, 2008

हमने भी ज़माने के कई रंग देखे है,
कभी धूप, कभी छाव, कभी बारिशों के संग देखे है।

जैसे जैसे मौसम बदला लोगों के बदलते रंग देखे है,

ये उन दिनों की बात है जब हम मायूस हो जाया करते थे,
और अपनी मायूसियत का गीत लोगों को सुनाया करते थे।

और कभी कभार तो ज़ज्बात मैं आकर आँसू भी बहाया करते थे,
और लोग अक्सर हमारे आसुओं को देखकर हमारी हँसी उड़ाया करते थे।

“अचानक ज़िन्दगी ने एक नया मोड़ लिया,
और हमने अपनी परेशानियों को बताना ही छोड़ दिया” ।

अब तो दूसरों की जिंदगी मैं भी उम्मीद का बीज बो देते है,
और खुद को कभी अगर रोना भी पड़े तो हँसते-हँसते रो देते है॥

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हमने भी ज़माने के कई रंग देखे है,
कभी धूप, कभी छाव, कभी बारिशों के संग देखे है।

जैसे जैसे मौसम बदला लोगों के बदलते रंग देखे है,

ये उन दिनों की बात है जब हम मायूस हो जाया करते थे,
और अपनी मायूसियत का गीत लोगों को सुनाया करते थे।

और कभी कभार तो ज़ज्बात मैं आकर आँसू भी बहाया करते थे,
और लोग अक्सर हमारे आसुओं को देखकर हमारी हँसी उड़ाया करते थे।

“अचानक ज़िन्दगी ने एक नया मोड़ लिया,
और हमने अपनी परेशानियों को बताना ही छोड़ दिया” ।

अब तो दूसरों की जिंदगी मैं भी उम्मीद का बीज बो देते है,
और खुद को कभी अगर रोना भी पड़े तो हँसते-हँसते रो देते है॥

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हम वो गुलाब है

हम वो गुलाब है जो टूट कर भी मुस्कान छोड़ जाते हैं,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं।

दुनिया के प्रेम प्रसंगो में हम गुलाबों को टूटना हीं पड़ता है,
और हमे देने वाले हर प्रेमी को झुकना हीं पड़ता है,
कभी हमे फरमाइश कभी नुमाइश बना दिया,
जी चाहा ज़ुल्फों में लगाया,जी चाहा सेज़ पे सज़ा दिया
मेरे तन को छेड़ कर , दीवाने कैसे मचल जाते हैं,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं।

बात अभी इतनी होती तो क्या बात थी,
पर अभी और भी काली होने वाली रात थी,
मेरे अरमानों को कुचल कर इत्र बना दिया,
और दिखावटी शिशियों में भर कर सजा दिया,
हम मर कर भी साँसों में महक छोड़ जाते है,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं।

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